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झारखंड की कला और संस्कृति का बढ़ा मान: सुशांत, सोमवारी और बुटन को मिला प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी का पुरस्कार


- दिव्यानंद साहू 

झारखंड की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए यह एक अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है। राष्ट्रीय स्तर पर घोषित प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी सम्मानों में झारखंड के होनहार कलाकारों ने एक बार फिर अपनी बेजोड़ प्रतिभा का लोहा मनवाया है। राज्य के प्रख्यात कलाकार श्री सुशांत कुमार महापात्र, सोमवारी देवी और बुटन देवी को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। इस बड़ी उपलब्धि ने पूरे राज्य में खुशी की लहर दौड़ा दी है। कला जगत द्वारा इन सभी कलाकारों को आज हार्दिक बधाई दी जा रही है।

इन सभी सम्मानित कलाकारों का संघर्ष और समर्पण अत्यंत प्रेरणादायक रहा है। बुटन देवी और सोमवारी देवी ने अपना संपूर्ण जीवन झारखंड की पारंपरिक और प्राचीन लोकनृत्य परंपराओं के अथक संरक्षण और निरंतर संवर्धन को पूरी तरह से समर्पित कर दिया है। दूसरी ओर, श्री सुशांत कुमार महापात्र ने सरायकेला की विश्वप्रसिद्ध और प्राचीन छऊ मुखौटा कला को केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक विशिष्ट और अमिट पहचान दिलाने में अपना अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक योगदान दिया है। इन तीनों महान कलाकारों की यह अनवरत साधना अब हमारी युवा पीढ़ी के लिए आदर्श बन चुकी है।

वरिष्ठ कलाकारों के साथ ही राज्य की होनहार युवा प्रतिभाओं ने भी अपना परचम लहराया है। झारखंड की युवा लोक कलाकार बबिता हेम्ब्रम को संताली नृत्य कला में तथा कुना समल को कला के विशेष क्षेत्र में उनके बेहतरीन और उत्कृष्ट योगदान के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण सम्मान संगीत नाटक अकादमी द्वारा देश की उभरती युवा प्रतिभाओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने के पावन उद्देश्य से हमेशा प्रदान किया जाता है। यह शानदार ऐतिहासिक उपलब्धि निश्चित रूप से हमारी समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत की बढ़ती राष्ट्रीय पहचान का प्रमाण है

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