राज्य के सबसे बड़े और प्रमुख सरकारी अस्पताल रिम्स में मरीजों की सुविधाओं की घोर अनदेखी का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। हमेशा से अपनी कुव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में रहने वाले इस अस्पताल ने इस बार महिलाओं की निजता और उनके सम्मान को ताक पर रख दिया है। रिम्स प्रबंधन ने एक ऐसा हैरान करने वाला कदम उठाया है, जिससे वहां आने वाली महिला मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रबंधन की इस लापरवाही भरे फैसले के कारण अस्पताल में महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंच रही है और बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव साफ दिखाई दे रहा है।
दरअसल, यह पूरा मामला अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित ओपीडी और ब्लड कलेक्शन सेंटर के पास बने शौचालयों से जुड़ा है। यहां मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों की सुविधा के लिए महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए गए थे। बीमारियों की जांच के लिए मल-मूत्र का सैंपल देने के लिए भी आम मरीज इन्ही शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन, अब रिम्स प्रबंधन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए महिलाओं के लिए बने इस शौचालय पर अचानक ताला जड़ दिया है। प्रबंधन के इस अमानवीय और मनमाने रवैये के कारण अस्पताल की व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
प्रबंधन ने महिला शौचालय को पूरी तरह से रिम्स के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के लिए आरक्षित कर दिया है। इसके दरवाजे पर बकायदा एक नोटिस चिपका दिया गया है कि यह टॉयलेट सिर्फ स्टाफ के लिए है। इस फरमान के बाद ग्राउंड फ्लोर पर आम जनता के लिए केवल पुरुष शौचालय ही खुला रह गया है। इस वजह से महिला मरीजों और उनके साथ आई महिलाओं को अपनी निजता से समझौता करते हुए मजबूरी में पुरुषों के शौचालय का ही इस्तेमाल करना पड़ रहा है। एक ही टॉयलेट में पुरुष और महिलाओं के जाने से स्थिति बेहद असहज और शर्मनाक हो गई है
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