- मनीष कुमार
सुपरस्टार प्रभास की फिल्म 'सालार' के खानसार साम्राज्य जैसा खौफ इन दिनों हजारीबाग के केरेडारी स्थित एनटीपीसी कोल परियोजना में देखा जा रहा है। यहां सुरक्षा दावों के बीच एक समानांतर अंडरग्राउंड सिंडिकेट सक्रिय है। इस सिंडिकेट का अपना एक गुप्त कोड वर्ड चलता है। जो हाईवा मालिक अपनी गाड़ी के शीशे पर 'SGP' (समसुल ग्रुप पाण्डु) का स्टीकर लगाता है, उसे ही माइंस में काम करने की अनुमति मिलती है। स्टीकर लगने के बाद गाड़ी को बिना किसी रोकटोक के लोडिंग स्लिप मिल जाती है। स्टीकर न लगाने वाले वाहन मालिकों को दो-दो दिन तक लोडिंग के लिए तरसाया जाता है। इस तरह लगभग दो सौ बाहरी गाड़ियां इस सिंडिकेट के चंगुल में पूरी तरह फंसी हुई हैं।
इस खौफनाक सिंडिकेट का आर्थिक जाल बहुत ही शातिर तरीके से बुना गया है। टंडवा पावर प्लांट के लिए प्रति टन तीन रुपये और टोरी साइडिंग के लिए दस रुपये की अवैध वसूली तय की गई है। एक अनुमान के मुताबिक, हर महीने करीब पच्चीस लाख रुपये की डकैती डाली जा रही है। सबूत मिटाने के लिए यह पैसा नकद नहीं लिया जाता। आरोप है कि ट्रांसपोर्टिंग कंपनी नकास सर्विसेज सीधे वाहन मालिकों के भाड़े से यह रकम काटकर सिंडिकेट के बैंक खातों में डाल देती है। हालांकि, कंपनी के अधिकारी इसे मुख्यालय का मामला बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं, जिससे इस पूरे काले खेल में कई बड़े सफेदपोशों की मिलीभगत की भी आशंका गहरा गई है।
इस अवैध वसूली के तार अब माओवादी फंडिंग और गैंगस्टरों से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। सिंडिकेट के सरगना मो. शमसुल पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। आरोप है कि यह काली कमाई संदिग्ध माओवादी संगठनों को भेजी जाती है। जब पत्रकारों ने इस सच को उजागर किया, तो सिंडिकेट ने उन्हें ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस बड़े खेल पर एनटीपीसी प्रबंधन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। मामले के तूल पकड़ने पर बड़कागांव एसडीपीओ अमित आनंद ने जांच के सख्त आदेश दिए हैं। पुलिस मोबाइल कॉल डिटेल्स और बैंक खातों की गहन जांच कर दोषियों को जल्द सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी में जुट गई है
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