झारखंड ट्रेजरी घोटाला मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी कार्रवाई बेहद तेज कर दी है। हजारीबाग जिला कोषागार से लगभग इकतीस करोड़ रुपये की भारी-भरकम अवैध वेतन निकासी के मामले में रिमांड पर लिए गए सभी पांचों आरोपियों को अड़तालीस घंटे की लंबी और कड़ी पूछताछ के बाद शुक्रवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सीआईडी की टीम ने इन आरोपियों से फर्जी वेतन पर्ची तैयार करने से लेकर उसे ट्रेजरी से पास कराने और उस अवैध राशि को कहाँ निवेश किया गया व कहाँ खर्च किया गया, इन सभी बिंदुओं पर गहनता से जानकारी जुटाई है।
जेल भेजे गए इन मुख्य आरोपियों में हजारीबाग एसपी कार्यालय की लेखा शाखा के मुख्य लेखापाल और सिपाही शंभू कुमार सिंह, उनकी पत्नी काजल कुमारी, उनके सहयोगी सिपाही रजनीश कुमार सिंह, उनकी पत्नी खुशबू कुमारी और धीरेंद्र कुमार सिंह शामिल हैं। रिमांड के दौरान पूछताछ में मिले अहम तथ्यों और सबूतों के आधार पर एसआईटी अब अपनी इस महत्वपूर्ण जांच को आगे बढ़ाएगी, जिससे भविष्य में इस बड़े घोटाले के और भी कई गहरे राज खुलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
हजारीबाग के साथ-साथ चाईबासा और बोकारो कोषागार से जुड़े मामलों में भी सीआईडी का शिकंजा आरोपियों पर लगातार कसता जा रहा है। चाईबासा जिला कोषागार से अवैध निकासी के मामले में बहत्तर घंटे की पूछताछ की अनुमति मिलने के बाद चार आरोपियों देवनारायण मुर्मू, सरकार हेम्ब्रम, अरुण माझी और गोराचंद माझी को शनिवार को जेल भेजा जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, बोकारो मामले में रिमांड पर लिए गए एएसआई अशोक भंडारी, गृह रक्षक सतीश कुमार और सिपाही काजल मंडल से भी बहत्तर घंटे की पूछताछ पूरी हो चुकी है और उन्हें भी पूछताछ के बाद जेल भेजने की आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

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