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42 ट्रकों के गायब होने पर प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि पर रोक, तीन हुए आरोप मुक्त


राज्य ब्यूरो, रांची द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारखंड प्रशासनिक सेवा के गलियारों में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। राज्य के कार्मिक विभाग ने एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए तीन अधिकारियों को विभिन्न भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोपों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है। वहीं, एक अन्य गंभीर मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए एक अधिकारी की दो वेतनवृद्धि पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई दुमका से जुड़े एक बड़े मामले में की गई है, जहां जब्त किए गए ट्रकों के रहस्यमय तरीके से गायब होने की पुष्टि हुई है।

कार्मिक विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के विस्तृत विवरण के अनुसार, विशुनपुरा (गढ़वा) के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा को बड़ी राहत मिली है। उन पर दस हजार रुपये घूस लेने का गंभीर आरोप लगा था, लेकिन भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इस मामले को न्यायालय में प्रमाणित करने में पूरी तरह विफल रहा। साक्ष्यों के अभाव में अदालत के फैसले के बाद उन्हें आरोप मुक्त कर दिया गया है। इसी कड़ी में गोला के तत्कालीन प्रखंड पदाधिकारी पवन कुमार महतो को भी सोलर लाइट और स्ट्रीट लाइट आदि की खरीदारी में कथित अनियमितता के मामले में राहत मिली है। जांच संचालन अधिकारी की रिपोर्ट और पंचायती राज विभाग के मंतव्य के आधार पर उन्हें भी क्लीन चिट दे दी गई है।

इसके अतिरिक्त, खूंटी जिला के अड़की की तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी मेरी मड़की पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही थी। उन पर मिट्टी मोरम पथ निर्माण में अनियमितता बरतने का आरोप था। हालांकि, विभागीय जांच पदाधिकारी द्वारा सौंपे गए प्रतिवेदन के आधार पर उन्हें भी इन आरोपों से बरी कर दिया गया है। इन तीनों अधिकारियों के लिए कार्मिक विभाग की यह अधिसूचना एक बड़ी राहत लेकर आई है।

वहीं दूसरी ओर, एक बेहद चौंकाने वाले मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। दुमका के शिकारीपाड़ा अंचल की तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) अमृता कुमारी पर विभागीय जांच में गंभीर आरोप पुष्ट हुए हैं। अवैध बालू के कारोबार पर कार्रवाई करते हुए 58 ट्रक जब्त किए गए थे, जिनमें से 42 ट्रक रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। इतनी बड़ी संख्या में ट्रकों के गायब होने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं देने के मामले में उन्हें विभागीय जांच में दोषी पाया गया है। इस घोर लापरवाही और संदिग्ध आचरण को गंभीरता से लेते हुए कार्मिक विभाग ने उनकी दो वेतनवृद्धि रोकने का कड़ा दंड निर्धारित किया है और इससे संबंधित अधिसूचना भी जारी कर दी है।

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