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हजारीबाग के ईचाक में चौंतीस साल लंबी कानूनी लड़ाई जीतने के बाद भी अपनी जमीन के लिए भटक रहा परिवार



- मनीष कुमार

हजारीबाग जिले के ईचाक प्रखंड स्थित परासी गांव का एक पीड़ित परिवार न्यायालय से अपनी पुश्तैनी जमीन का मुकदमा जीतने के बावजूद दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। पीड़ित बिनोद रजक और उनके परिवार ने हजारीबाग के उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। परिवार का आरोप है कि अदालत से अंतिम फैसला उनके पक्ष में आने के बाद भी कुछ स्थानीय लोग जानबूझकर उनकी पुश्तैनी जमीन पर विवाद खड़ा कर रहे हैं। ये दबंग लोग निजी जमीन को जबरन सार्वजनिक घोषित कराने की कोशिश कर रहे हैं। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से सुरक्षा मांगी है।

यह पूरा भूमि विवाद दशकों पुराना है। स्वर्गीय मुटरी देवी के नाम पर मौजा परासी में 57 डिसमिल जमीन की बंदोबस्ती वर्ष 1954 में हुई थी। तब से यह परिवार इस जमीन पर काबिज है। बिनोद ने बताया कि इस जमीन को लेकर वर्ष 1993 में टाइटल सूट दायर किया गया था। करीब तीन दशक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 2022 में फैसला पिता डोमन रजक के पक्ष में आया था। इसके खिलाफ दायर अपील को भी वर्ष 2026 में जिला अदालत ने खारिज कर दिया। इस लंबी कानूनी जंग में पिता सहित दो सगे भाइयों का निधन हुआ।

न्याय मिलने के बावजूद अंचल कार्यालय का रवैया निराशाजनक रहा है। आवेदन के अनुसार, बीते नौ जून को जब परिवार अदालत के वैध दस्तावेजों के साथ ईचाक अंचल कार्यालय पहुंचा, तो वहां तैनात प्रभारी अंचल अधिकारी ने उनकी बात सुनने से ही साफ इनकार कर दिया। परिवार की महिलाओं ने भी अंचल कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी दलीलों को नजरअंदाज किया गया और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार भी हुआ है। इस दुर्व्यवहार से परेशान और भयभीत पीड़ित परिवार ने हजारीबाग उपायुक्त से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई मांगी है

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