हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज सह सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चोरहट्टा निवासी 25 वर्षीय सुषमा देवी को प्रसव के लिए 11 तारीख को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर और नर्स तीन दिनों तक नॉर्मल डिलीवरी का झूठा झांसा देते रहे। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद 12 जून की रात अचानक यह कहकर ऑपरेशन किया गया कि बच्चा गंदा पानी पी रहा है। सुषमा खुद पैदल चलकर हंसते हुए ऑपरेशन थिएटर गई थी।
रात में ऑपरेशन के बाद नवजात बच्चा तो सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन परिजनों का गंभीर आरोप है कि नवजात को सौंपने के एवज में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने 500 रुपये की घूस जबरन ऐंठ ली। जब सुषमा को बाहर लाया गया तो उसकी हालत बेहद नाजुक थी। उसे लगातार हिचकी आ रही थी और अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। परिजनों के बुलाने पर भी डॉक्टरों ने दरवाजा नहीं खोला और उल्टे एक नर्स ने उन्हें डांट दिया। जब मरीज की सांसें थम गईं, तो अपनी गलती छिपाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने जबरन रांची रेफर का पर्चा थमा दिया।
इस दर्दनाक घटना के बाद अस्पताल में हंगामा बढ़ते देख गायनो वार्ड के सभी डॉक्टर, नर्स और आउटसोर्सिंग कर्मचारी रातों-रात अस्पताल छोड़कर फरार हो गए, जिससे अन्य गंभीर मरीज भगवान भरोसे रह गए। मामले की सूचना मिलते ही हजारीबाग के नवनिर्वाचित सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने अस्पताल पहुंचकर लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताई और अयोग्य आउटसोर्सिंग स्टाफ को हटाने की मांग की। नवजात के सिर से जन्म लेते ही मां का साया उठने से परिवार सदमे में है। आक्रोशित परिजनों ने दोषी डॉक्टरों और कर्मियों पर एफआईआर कर सख्त कार्रवाई नहीं होने पर सड़क जाम की चेतावनी दी है।
- मनीष कुमार, संवाददाता (हजारीबाग)


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