झारखंड के देवघर जिले के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग खिलाड़ी अनम हैदर ने राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कई वर्षों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश तथा झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अनेक पदक अर्जित किए हैं। लेकिन, विडंबना यह है कि खेल के मैदान में राज्य का मान बढ़ाने वाले इस होनहार खिलाड़ी को आज तक न तो कोई उचित रोजगार मिला है और न ही वह सम्मान जिसके वे वास्तव में हकदार हैं।
अनम हैदर केवल एक बेहतरीन एथलीट ही नहीं हैं, बल्कि उन्होंने एमबीए (मार्केटिंग) जैसी उच्च शिक्षा भी प्राप्त की है। अपनी शानदार खेल उपलब्धियों और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार नौकरी और सम्मान के लिए लिखित गुहार लगाई है। इसके बावजूद, अब तक किसी भी स्तर पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है, जिससे वे अत्यंत निराश और मानसिक रूप से चिंतित हैं। अन्य खिलाड़ियों को मिलने वाली नकद पुरस्कार राशि (कैश अवार्ड) और राज्य स्तरीय खेल सम्मान से भी उन्हें अब तक पूरी तरह वंचित रखा गया है।
लगातार हो रही इस प्रशासनिक उपेक्षा से आहत होकर अनम हैदर ने अब कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि राज्य सरकार और संबंधित विभाग जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान देकर उन्हें उचित रोजगार, खेल सम्मान और देय नकद राशि प्रदान नहीं करते हैं, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और वैधानिक मार्ग अपनाने को बाध्य होंगे। यह पूरी स्थिति झारखंड में खिलाड़ियों के भविष्य और सरकारी खेल नीतियों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

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