- मनीष कुमार
हजारीबाग शहर के इतिहास और पुराने सरकारी नक्शों में दर्ज 17 ऐतिहासिक कुएं अब कंक्रीट के बढ़ते जाल की भेंट चढ़कर गायब हो चुके हैं। ये कुएं कभी शहर की प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली की रीढ़ माने जाते थे। हाल ही में सामने आए एक गुप्त सर्वे में जब इन कुओं के जमीनी अस्तित्व पर सवाल उठे, तो नगर निगम प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया। भविष्य के गंभीर जल संकट से शहर को बचाने के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। इन खोए हुए जल स्रोतों का पता लगाने के लिए प्रशासन ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है।
इन गायब हो चुके प्राचीन कुओं को खोजने के लिए नगर निगम ने पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक विज्ञान का सहारा लिया है। इस खोज अभियान को एक सीक्रेट मिशन की तरह अंजाम दिया जा रहा है। अत्याधुनिक ड्रोन कैमरे आसमान से शहर के चप्पे-चप्पे की निगरानी कर रहे हैं, वहीं जमीन के भीतर दबे ढांचों की सटीक लोकेशन जानने के लिए 'भूगर्भीय रडार तकनीक' का विशेष इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा जल प्रबंधन विशेषज्ञों की एक स्पेशल टीम का भी गठन किया गया है, जो इन लुप्त जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति और वाटर लेवल की गहन जांच करेगी।
नगर निगम के इस मिशन की खबर फैलते ही हजारीबाग के नागरिकों में भारी उत्साह है। स्थानीय लोग अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के इस कदम का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कुओं को खोजना ही नहीं, बल्कि जल प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी के पास इन कुओं या पुराने नक्शों की कोई भी जानकारी हो, तो वे तुरंत निगम को बताएं। विज्ञान और जनता की यह भागीदारी इन ऐतिहासिक जल स्रोतों को वापस लाने की एक अहम पहल है
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