- मनीष कुमार
झारखंड राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों ने सरकार की उपेक्षा और स्थानीय नीति पर ढुलमुल रवैये के खिलाफ हजारीबाग में हुंकार भरी है। पुराना धरना स्थल पर अशोक राम की अध्यक्षता में खतियानी परिवार की एक अहम बैठक हुई। खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने आंदोलनकारियों की मांगें जल्द पूरी नहीं कीं, तो राज्य भर में एक बड़ा और अनवरत आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस उग्र आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। आंदोलनकारी आर पार की लड़ाई को तैयार हैं।
महासचिव मोहम्मद हकीम ने याद दिलाया कि पिछले दिनों रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार का घेराव करने का आह्वान किया गया था। तब वार्ता में सरकार ने आधिकारिक आश्वासन दिया था कि कैबिनेट की पहली बैठक में आंदोलनकारियों के अधिकारों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा। इसी वादे पर घेराव स्थगित हुआ था। लेकिन अब सरकार अपने वचनों से मुकर रही है, जिससे आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। लोगों ने राज्य निर्माण के लिए आहुति दी थी, लेकिन आज भी उन्हें सुविधाओं, रोजगार और बुनियादी अधिकारों के लिए दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं, जो दुखद है।
बैठक में आंदोलनकारियों की आवाज को दबाने के लिए पुलिस प्रशासन के दुरुपयोग पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पुलिस तैनात की जाती है, जिससे शिबू सोरेन के सपनों का झारखंड अधूरा है। आज आंदोलनकारियों के बच्चों को नौकरी और आरक्षण का उचित लाभ नहीं मिल रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर उनका एक पैर कब्र में है और वे बेबसी का शिकार हैं। खतियानी परिवार ने अंत में मांग की है कि सरकार अपनी घोषित नीतियों पर अडिग रहकर सभी चिन्हित आंदोलनकारियों को जल्द से जल्द सम्मान और स्थाई पेंशन प्रदान करे
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