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हजारीबाग में आंदोलनकारियों की हुंकार: खतियानी परिवार ने सरकार की ढुलमुल नीति को घेरा, हक न मिलने पर अनवरत आंदोलन की चेतावनी कैबिनेट की पहली बैठक में सार्थक निर्णय लेने के आश्वासन पर स्थगित हुआ था रांची घेराव, वादे से मुकरने पर बढ़ा आक्रोश हजारीबाग: झारखंड राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों की उपेक्षा और स्थानीय नीति को लेकर सरकार के ढुलमुल रवैये के खिलाफ हजारीबाग में आक्रोश की आवाज बुलंद हुई है। पुराना धरना स्थल के नजदीक अशोक राम की अध्यक्षता में खतियानी परिवार की एक महत्वपूर्ण साप्ताहिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में आंदोलनकारियों की बदहाली, पुलिसिया चौकसी और सरकार की ओर से किए गए वादों की कड़वी सच्चाई को उजागर किया गया। बैठक को संबोधित करते हुए खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर सरकार ने जल्द ही आंदोलनकारियों की शर्तों को पूरा नहीं किया, तो राज्य भर में एक बार फिर अनवरत और बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी। रांची घेराव के बाद मिला था सिर्फ आश्वासन: वादे पर अडिग रहे हेमंत सोरेन सरकार, वार्ता के बाद बदला था फैसला विधानसभा की कैबिनेट बैठक में निर्णय लेने का था भरोसा, मांगें पूरी नहीं हुईं तो आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं झारखंडी बैठक में पूर्व के घटनाक्रमों की परतें खोलते हुए मोहम्मद हकीम ने बताया कि रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार का घेराव करने का एक व्यापक आह्वान झारखंड आंदोलनकारियों द्वारा किया गया था। इस घेराव के दौरान सरकार के प्रतिनिधियों और आंदोलनकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय भेंट वार्ता हुई, जिसमें यह तय पाया गया था कि विधानसभा की कैबिनेट की पहली ही बैठक में आंदोलनकारियों के हक और अधिकारों के संबंध में एक सार्थक और ठोस निर्णय ले लिया जाएगा। सरकार की ओर से मिले इसी आधिकारिक आश्वासन के बाद आंदोलन को अस्थाई रूप से स्थगित किया गया था। लेकिन, अगर अब इस वादे से मुकरने की कोशिश की गई तो झारखंड के सदान और आदिवासी समाज के लोग चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने याद दिलाया कि झारखंडी लोगों ने अपना तन, मन और धन लगाकर इस राज्य के निर्माण में अपनी आहुति दी थी, लेकिन आज भी उन्हें अपने अधिकारों के लिए तरसना पड़ रहा है। पुलिसिया चौकसी पर उठाए गंभीर सवाल: आंदोलनकारियों को रोकने के लिए तैनात की जा रही पुलिस, हक देने में लाचार प्रशासन शिबू सोरेन के सपनों का झारखंड अब भी अधूरा, आंदोलनकारियों के बाल-बच्चों को नहीं मिल पा रही सुविधाएं खतियानी परिवार ने आंदोलनकारियों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के लिए किए जा रहे प्रशासनिक प्रयासों की भी कड़े शब्दों में निंदा की। मोहम्मद हकीम ने कहा कि जब भी आंदोलनकारी अपनी दशा सुधारने और झारखंड सरकार से मिलने के लिए किसी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करते हैं, तब सरकार उन्हें जगह-जगह रोकने के लिए पुलिस प्रशासन की चौकसी बढ़ा देती है। ऐसी दमनकारी स्थिति में आंदोलनकारी आवाक रह जाते हैं और सरकार से सीधी भेंट वार्ता नहीं कर पाते, जिससे पूरा आंदोलन दिशाहीन होकर बिखर जाता है। उन्होंने सरकार से निवेदन किया कि पुलिस की यह चौकसी आंदोलनकारियों के विरोध में नहीं, बल्कि उनकी सहायता के लिए बढ़ाई जानी चाहिए। शिबू सोरेन ने जिस झारखंड के निर्माण की कल्पना की थी, आज उनके बाल-बच्चों को वह सुविधाएं, नौकरी-चाकरी, ठेकेदारी और पेटेदारी में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय नीति पर मुकर रही है सरकार: एक पैर धरती पर और दूसरा कब्र में, बेबसी पर हंसने वालों की खड़ी हुई जमात चिन्हित आंदोलनकारियों को जल्द मिले सम्मान और पेंशन, घोषित वचनों पर अडिग रहने की उठी मांग स्थानीय नीति के मुद्दे पर खतियानी परिवार ने सरकार की नीत और नीयत दोनों को कटघरे में खड़ा किया। बैठक में आरोप लगाया गया कि झारखंडी लोगों की इस मुख्य समस्या को लेकर सरकार सैकड़ों बार अपने वादों से मुकर चुकी है। सरकार की वर्तमान नीतियां आंदोलन को कुचलने के लिए कटिबद्ध दिखाई देती हैं, जिससे प्रदेश के मूलवासियों की कमर टूट चुकी है। अत्यंत भावुक और कड़े शब्दों में आंदोलनकारियों ने अपनी बेबसी व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी स्थिति अब इस पार या उस पार की लड़ाई लड़ने लायक भी नहीं बची है, क्योंकि हमारा एक पैर धरती पर टिका है और दूसरा कब्र तक पहुंच चुका है। इस बेबसी को देखते हुए सरकार को सीधे वार्ता कर अपने घोषित वचनों पर अडिग रहना चाहिए और चिन्हित आंदोलनकारियों को जल्द से जल्द सम्मानित कर उनके लिए स्थाई पेंशन निर्धारित करनी चाहिए। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से महेश विश्वकर्मा, मोहम्मद शौकत राजा, मेघ मेहता, असलम खान, बबलू मेहता, बोधी साव, प्रदीप कुमार मेहता, अमर कुमार गुप्ता, कुंती देवी, मीना देवी, राधा देवी, सुरेश महतो, चंद्र राम और शोएब अंसारी सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित थे।



- मनीष कुमार

झारखंड राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों ने सरकार की उपेक्षा और स्थानीय नीति पर ढुलमुल रवैये के खिलाफ हजारीबाग में हुंकार भरी है। पुराना धरना स्थल पर अशोक राम की अध्यक्षता में खतियानी परिवार की एक अहम बैठक हुई। खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने आंदोलनकारियों की मांगें जल्द पूरी नहीं कीं, तो राज्य भर में एक बड़ा और अनवरत आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस उग्र आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। आंदोलनकारी आर पार की लड़ाई को तैयार हैं।

महासचिव मोहम्मद हकीम ने याद दिलाया कि पिछले दिनों रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार का घेराव करने का आह्वान किया गया था। तब वार्ता में सरकार ने आधिकारिक आश्वासन दिया था कि कैबिनेट की पहली बैठक में आंदोलनकारियों के अधिकारों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा। इसी वादे पर घेराव स्थगित हुआ था। लेकिन अब सरकार अपने वचनों से मुकर रही है, जिससे आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। लोगों ने राज्य निर्माण के लिए आहुति दी थी, लेकिन आज भी उन्हें सुविधाओं, रोजगार और बुनियादी अधिकारों के लिए दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं, जो दुखद है।

बैठक में आंदोलनकारियों की आवाज को दबाने के लिए पुलिस प्रशासन के दुरुपयोग पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पुलिस तैनात की जाती है, जिससे शिबू सोरेन के सपनों का झारखंड अधूरा है। आज आंदोलनकारियों के बच्चों को नौकरी और आरक्षण का उचित लाभ नहीं मिल रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर उनका एक पैर कब्र में है और वे बेबसी का शिकार हैं। खतियानी परिवार ने अंत में मांग की है कि सरकार अपनी घोषित नीतियों पर अडिग रहकर सभी चिन्हित आंदोलनकारियों को जल्द से जल्द सम्मान और स्थाई पेंशन प्रदान करे

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