नई दिल्ली में नीति आयोग की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि झारखंड को सिर्फ खनिज संपदा वाले राज्य के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके सर्वांगीण विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने पर बल देते हुए केंद्र सरकार से 220 अतिरिक्त स्नातक और 217 स्नातकोत्तर मेडिकल सीटों की लंबित स्वीकृति को जल्द से जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था में सुधार के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण कर रही है, लेकिन इन व्यापक प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए केंद्र के वित्तीय और ढांचागत सहयोग की सख्त जरूरत है ताकि राज्य के बच्चों को एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य मिल सके।
कौशल विकास और रोजगार सृजन को अपनी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में लाखों युवाओं को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है और कई अन्य को आधुनिक रोजगार से जोड़ने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से स्थापित किए जा रहे मेगा स्किलिंग इकोसिस्टम का भी जिक्र किया। खेलों में झारखंड की अंतरराष्ट्रीय पहचान और हॉकी, फुटबॉल तथा तीरंदाजी जैसे खेलों में राज्य के युवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए सोरेन ने एक बड़ी मांग रखी। उन्होंने केंद्र सरकार से झारखंड में एक राष्ट्रीय स्तर का खेल विश्वविद्यालय और उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) स्थापित करने की विशेष अपील की, ताकि दूरदराज की ग्रामीण प्रतिभाओं को विश्व स्तर पर अपनी क्षमता दिखाने का उचित मंच और संसाधन मिल सके।
बैठक में सबसे प्रमुख और ज्वलंत मुद्दा कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का रहा, जिसे मुख्यमंत्री ने राज्य के बुनियादी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया कि इस बकाया राशि के न मिलने से राज्य में जल जीवन मिशन जैसी कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं और कल्याणकारी योजनाएं सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं। सोरेन ने दृढ़ता से कहा कि यदि यह जायज बकाया राशि राज्य को समय पर प्राप्त हो जाती है, तो इसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और मानव संसाधन निर्माण के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकेगा, जिससे झारखंड के लाखों आम लोगों के जीवन स्तर में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आएगा।

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