Top News

रांची यूनिवर्सिटी एडमिशन: क्लस्टर सिस्टम से घटेंगी स्नातक की 15% सीटें, दाखिले के लिए बढ़ेगी छात्रों की परेशानी

 

इंटरमीडिएट के नतीजे जारी होने के बाद झारखंड के विद्यार्थी रांची विश्वविद्यालय में स्नातक (ग्रेजुएशन) नामांकन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक विश्वविद्यालय के अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। इसी बीच छात्रों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। विश्वविद्यालय में जल्द ही 'क्लस्टर सिस्टम' लागू होने वाला है, जिसके परिणामस्वरूप स्नातक की सीटों में 10 से 15 प्रतिशत तक की भारी कटौती हो जाएगी। इस नए नियम से कॉलेजों में सीटें सीमित हो जाएंगी और एडमिशन के लिए छात्रों के बीच मारामारी और प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ जाएगी।

रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत कुल 22 संबद्ध कॉलेज आते हैं, जहां यूजी से लेकर पीजी तक की पढ़ाई होती है और राज्य भर के छात्र बड़ी संख्या में यहां दाखिला लेते हैं। वर्तमान में इन सभी कॉलेजों को मिलाकर स्नातक स्तर पर लगभग 40 हजार सीटें उपलब्ध हैं। लेकिन क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद यह आंकड़ा घटकर 36 हजार के करीब आ सकता है। जानकारों के अनुसार, पहले नामांकन प्रक्रिया के दौरान कॉलेजों द्वारा अपने स्तर से सीटें बढ़ा दी जाती थीं, जिससे छात्रों की संख्या तो बढ़ जाती थी, लेकिन शिक्षकों की काफी कमी हो जाती थी। इस नई व्यवस्था से इसी असंतुलन को रोका जाएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि डोरंडा कॉलेज में इतिहास विषय के लिए 150 सीटों पर नामांकन होता था, तो सिस्टम लागू होने के बाद यह घटकर 120 हो जाएगा।

इस बीच, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में पहले से ही इसी नए आधार पर नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार, वहां पारंपरिक विषयों में स्नातक स्तर पर 120 सीटों और पीजी में 60 सीटों पर दाखिला लिया जा रहा है। वोकेशनल कोर्सेज और कॉमर्स जैसे बड़े विभागों में अधिकतम 180 सीटों पर नामांकन की व्यवस्था की गई है। पिछले कुछ वर्षों तक विश्वविद्यालय में पारंपरिक विषयों में 130 से 140 सीटों पर दाखिले होते थे। चूंकि इस वर्ष इंटरमीडिएट की परीक्षा में लाखों विद्यार्थी सफल हुए हैं, ऐसे में सीटें कम होने से कई छात्रों को नामांकन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इस नई व्यवस्था को लेकर शिक्षाविदों ने भी अपनी गहरी चिंताएं जाहिर की हैं। डोरंडा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. जीएस तिवारी का मानना है कि बिना पूरी तैयारी और बुनियादी संसाधन के सीटों में कटौती करने से सिस्टम फेल हो सकता है, क्योंकि शहरी कॉलेजों में ग्रामीण क्षेत्रों से भी भारी संख्या में छात्र आते हैं। सरकार को कोई भी फैसला लेने से पहले कॉलेजों की जमीनी स्थिति जरूर देखनी चाहिए। दूसरी तरफ, रांची विवि के डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहु ने स्पष्ट किया है कि क्लस्टर सिस्टम पूरी तरह लागू होने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि सीटों में वास्तव में कितनी कमी आ रही है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन को भी वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी नहीं है और आगे जो भी सरकारी आदेश आएगा, उसी के आधार पर दाखिले की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

Post a Comment

और नया पुराने